आधुनिक भारत में प्रेस का विकास
Development of the Press in Modern India
Development of the Press in Modern India
Question 27 of 61
Language:
Question 27
नील आंदोलन का जमकर समर्थन करने वाले 'हिंदू पैट्रियाट' के संपादक थे-
[U.P. P.C.S. (Pre) 1998],
[U.P. P.S.C. (GIC) 2010]
Explanation
नील आंदोलन की एक खास बात यह थी कि बंगाल के उस समय के बुद्धिजीवियों ने भी इसमें सक्रिय भूमिका निभाई थी और संघर्षरत किसानों के समर्थन में सशक्त अभियान चलाया था। नील आंदोलन इतिहास में अपनी मांगों को लेकर किए गए आंदोलनों में सर्वाधिक व्यापक और जुझारू था। बंगाल का नील विद्रोह शोषण के विरुद्ध किसानों की सीधी लड़ाई थी। 'हिंदू पैट्रियाट' के संपादक हरिश्चंद्र मुखर्जी ने तो इस आंदोलन में काफी काम किया। हिंदू पैट्रियाट के पहले दो वर्षों (1853-55 ई.) में गिरीशचंद्र घोष संपादक थे। 1855 ई. में हरिश्चंद्र मुखर्जी इसके संपादक हो गए। वह निर्भीकता से बागान-मालिकों के अत्याचारों की पोल खोलने तथा सताए हुए किसानों की सहायता में लगे रहे। 1861 ई. में क्रिस्टोदास पाल इसके संपादक बने। वह ब्रिटिश शासन के प्रशंसक थे और ब्रिटिश उदारवाद का प्रतिपादन करते थे। उनके प्रभाव में हिंदू पैट्रियाट उच्च-मध्यम वर्गीय बंगाली जमींदारों के में हितों का प्रतिनिधित्व करता था।