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बौद्ध धर्म
Buddhism
Question 56 of 124
Language:
Question 56
अष्टांग मार्ग की संकल्पना, अंग है- [I.A.S. (Pre) 1998]
A. (a) दीपवंश की विषयवस्तु का
B. (b) दिव्यावदान की विषयवस्तु का
C. (c) महापरिनिब्बान की विषयवस्तु का
D. (d) धर्मचक्रप्रवर्तन सुत्त की विषयवस्तु का
Explanation गौतम बुद्ध ने चतुर्थ आर्य सत्य में दुःख निरोध का उपाय बताया। इसे 'दुःख निरोध गामिनी प्रतिपदा' कहा जाता है। इसे 'मध्यमा प्रतिपदा' या मध्यम मार्ग भी कहते हैं। इस मध्यमा प्रतिपदा में आठ सोपान हैं, इसलिए इसे 'अष्टांगिक मार्ग' भी कहते हैं। ये आठों सोपान हैं-सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाक्, सम्यक् कर्मांत, सम्यक आजीव, सम्यक् व्यायाम, सम्यक् स्मृति एवं सम्यक् समाधि। अष्टांगिक मार्ग धर्मचक्रप्रवर्तन सुत्त की विषयवस्तु का अंग है।
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