ब्रिटिश शासन का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
Impact of British rule on the Indian economy
Question 11 of 45
Language:
Question 11
चिरस्थायी बंदोबस्त, 1793 के अंतर्गत जमींदारों से अपेक्षा की गई थी कि वे खेतिहरों को पट्टा जारी करेंगे। अनेक जमींदारों ने पट्टा जारी नहीं किए। इसका कारण था- [I.A.S. (Pre) 2001]
A. (a) जमींदारों के ऊपर किसानों का विश्वास था।
B. (b) जमींदारों के ऊपर कोई सरकारी नियंत्रण नहीं था।
C. (c) यह ब्रिटिश सरकार की जिम्मेदारी थी।
D. (d) खेतिहरों की दिलचस्पी पट्टा प्राप्त करने में नहीं थी।
Explanation लॉर्ड कार्नवालिस ने 1793 ई. में स्थायी बंदोबस्त व्यवस्था लागू की। इसके तहत जमींदार, जिन्हें भू-स्वामी के रूप में मान्यता प्राप्त थी, को अपने क्षेत्रों में भू-राजस्व की वसूली कर उसका 1/11वां हिस्सा अपने पास रखना होता था और शेष हिस्सा कंपनी के पास जमा करना होता था। जमींदार काश्तकारों से मनचाहा लगान वसूल करता था और समय से लगान न देने वाले काश्तकारों से जमीन भी वापस छीन ली जाती थी। कुल मिलाकर काश्तकार पूरी तरह जमींदारों की दया पर निर्भर होता था। जमींदारों के ऊपर कोई सरकारी नियंत्रण नहीं था तथा इस कारण बहुत से मामलों में पट्टे जारी नहीं किए जाते थे। इसी के फलस्वरूप 1859 ई. के रेंट अधिनियम (रेंट एक्ट) पारित होने के तीन दशक पहले कुछ जिलों में और बंगाल-बिहार सीमा के संथाल क्षेत्र के किसानों ने अपने परंपरागत अधिकारों की रक्षा के लिए हिंसा का सहारा लिया।
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